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गन्ने में दूब घास

गन्ने में दूब घास, मोथा, बेल और अन्य खरपतवार का एक साथ नियंत्रण कैसे करें?

गन्ने की फसल में खरपतवार बढ़ जाने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई बार खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, सकरी पत्ती वाले खरपतवार, दूब घास, मोथा और बेल वाले खरपतवार एक साथ दिखाई देने लगते हैं। ऐसी स्थिति में अलग-अलग दवा के बजाय सही विकल्प चुनना जरूरी हो जाता है।

यदि खरपतवार बहुत अधिक फैल चुके हैं तो ऐसी हर्बिसाइड का चयन करना चाहिए, जिसका असर खरपतवारों पर हो और गन्ने की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अलग-अलग प्रकार के खरपतवारों के लिए अलग तकनीकी तत्व वाली दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

चौड़ी पत्ती और बेल वाले खरपतवार के लिए क्या करें?

यदि खेत में मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार या बेल वाले खरपतवार मौजूद हैं, तो 24D सोडियम साल्ट का स्प्रे किया जा सकता है।

इसकी अनुशंसित मात्रा प्रति एकड़ 500 से 600 मिलीलीटर रखी जा सकती है। यह विशेष रूप से उन बेल वाले खरपतवारों के नियंत्रण में उपयोगी है जो गन्ने पर चढ़कर पौधों को आपस में उलझा देते हैं।

ध्यान रखें कि निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का प्रयोग करने पर गन्ने पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्रति एकड़ 500 से 600 मिलीलीटर की मात्रा ही रखें।

जब खेत में सभी प्रकार के खरपतवार मौजूद हों

यदि खेत में चौड़ी पत्ती वाले और सकरी पत्ती वाले दोनों प्रकार के खरपतवार मौजूद हैं, तो टॉपरामाजोन तकनीकी तत्व वाली दवाओं का चयन किया जा सकता है।

मार्केट में यह तकनीकी तत्व कई उत्पादों में उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं:

  • स्टिंजर
  • गिलाडो
  • बेस कम्प्लीट

इसी प्रकार टेम्बोट्रायोन तकनीकी तत्व वाली बायर की लाउडिश भी उपयोग की जा सकती है। यह दूब घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण में प्रभावी बताई गई है।

ट्रिसल का उपयोग कब किया जा सकता है?

यूपीएल की ट्रिसल भी खरपतवार नियंत्रण के लिए एक विकल्प है। इसका 1200 ग्राम का पैक एक एकड़ गन्ने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

इस उत्पाद में तीन तकनीकी तत्व मौजूद होते हैं, जिनमें 24D सोडियम साल्ट और पैसफरा मिथाइल भी शामिल हैं। तीन तकनीकी तत्व होने के कारण इसे प्रभावी माना गया है।

ट्रिसल के उपयोग से:

  • दूब घास का नियंत्रण किया जा सकता है।
  • मोथा घास का ऊपरी भाग सूख जाता है, हालांकि जड़ से समाप्त नहीं होता।
  • बेल वाले तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार भी नियंत्रित हो जाते हैं।

मोथा घास होने पर क्या मिलाना चाहिए?

यदि खेत में मोथा घास भी मौजूद है, तो केवल ऊपर बताई गई दवाओं का उपयोग पर्याप्त नहीं माना गया है।

ऐसी स्थिति में स्टिंजर, गिलाडो, ट्रिसल या अन्य बताए गए विकल्पों के साथ सैंपरा मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है।

सैंपरा मिलाने पर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, सकरी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा घास के नियंत्रण में सहायता मिलती है।

खरपतवार नियंत्रण करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

खरपतवार नियंत्रण के लिए पहले गुड़ाई को प्राथमिकता देना बेहतर माना गया है। यदि किसी कारण से गुड़ाई संभव न हो, तब ही हर्बिसाइड का उपयोग करना चाहिए।

बरसात के मौसम में गुड़ाई करना कई बार कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में ऐसे हर्बिसाइड का चयन करना उचित रहता है जिनका गन्ने की फसल पर कम प्रभाव पड़े।

यदि खेत में केवल चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार ही हैं, तो केवल 24D सोडियम साल्ट का उपयोग करके भी उनका नियंत्रण किया जा सकता है। वहीं, अलग-अलग प्रकार के खरपतवार एक साथ होने पर स्टिंजर, गिलाडो, बेस कम्प्लीट, लाउडिश या ट्रिसल जैसे विकल्पों का चयन किया जा सकता है।

गन्ने में खरपतवार का नियंत्रण इस बात पर निर्भर करता है कि खेत में किस प्रकार के खरपतवार मौजूद हैं। केवल चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार होने पर 24D सोडियम साल्ट का उपयोग किया जा सकता है। यदि चौड़ी पत्ती, सकरी पत्ती, दूब घास और अन्य खरपतवार एक साथ हों, तो टॉपरामाजोन, टेम्बोट्रायोन या ट्रिसल जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। मोथा घास की स्थिति में सैंपरा मिलाकर स्प्रे करना बताया गया है। साथ ही, जहाँ तक संभव हो, खरपतवार नियंत्रण के लिए पहले गुड़ाई को प्राथमिकता देना चाहिए और आवश्यकता होने पर ही हर्बिसाइड का प्रयोग करना चाहिए।

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